अमेरिका के रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस के दौरे से भारत को उम्मीदें

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नई दिल्ली । अमेरिका के रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस अगले हफ्ते दो दिन की यात्रा पर भारत आ रहे हैं। जेम्स मैटिस 25 और 26 सितम्बर को भारत दौरे पर रहेंगे। भारत और अमेरिका के मजबूत राजनीतिक संबंधों के चलते दोनों देशों के बीच रक्षा समझौते परवान चढ़ रहे हैं। ऐसी ही एक कोशिश अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस के भारत दौरे के वक्त होगी। अमेरिकी रक्षा मंत्री 25 सितंबर को नई दिल्ली पहुंच रहे हैं, जहां वो भारत के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने के एजेंडे पर कार्य करेंगे। दोनों देशों में समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और संयुक्त रक्षा उत्पादन प्रॉजेक्ट पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा चीन और अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र में सुरक्षा हालात की चुनौतियों से निपटने पर भी बात की जाएगी। भारत की नई रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अमेरिकी रक्षा मंत्री के साथ यह पहली मुलाकात होगी।

मैटिस के भारत दौरे में निगरानी और खुफिया सूचना इकट्ठा करने में मुस्तैद 22 अमेरिकी गार्डियन ड्रोन की खरीददारी के सौदे पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। दो से तीन अरब डॉलर की कीमत वाले 22 गार्डियन ड्रोनों की बिक्री संबंधी सौदे की औपचारिक रूप से घोषणा नहीं की गई है। भारत की कोशिश होगी कि मैटिस के इस दौरे में एफ-16 लड़ाकू विमान को लेकर समझौता हो जाए। इसकी खरीददारी को लेकर काफी पहले से चर्चा हो रही है। हालांकि अभी समझौता अंजाम तक नहीं पहुंच सका है। बता दें कि अमरिका की ओर से वर्ष 1999 में एफ-16 लड़ाकू विमानों की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी। ऐसे में इस विमान के उत्पादन में भी कमी आयी है। हालांकि अमेरिकी रक्षा कंपनी की ओर से भारतीय वायुसेना को एफ-16 लड़ाकू विमान का उन्नत वर्जन एफ-16 ब्लॉक 70 की बिक्री का ऑफर दिया गया है। विमानों की उत्पादन यूनिट को टाटा के साथ मिलकर भारत में स्थापित किया जाना है, जबकि इसकी असेंबलिंग टेक्सस में होगी।

भारत-अमेरिकी रक्षा समझौतों की राह में सबसे बड़ी बाधा यह है कि अमेरिकी रक्षा कंपनियां संवेदनशील तकनीकी पर नियंत्रण बनाए रखना चाहती हैं और किसी तरह की जोखिम गारंटी लेने से भी बच रही हैं। सोवियत युग के मिग विमान हटाए जाने के बाद सेना में सैकड़ों विमानों की कमी हो गई है और तीन दशकों से घरेलू विमान बनाने की योजना अधर में लटकी हुई है। ऐसे में भारत, अमेरिकी कंपनियों को मेक इन इंडिया के तहत देश में विमान निर्माण का निमंत्रण दे रहा है। लेकिन भारत की यह पहल कंपनियों की शर्तों की वजह से आगे नहीं बढ़ पा रही है। ऐसे में अमेरिकी रक्षा मंत्री के भारत दौरे में बड़े समझौते होने की उम्मीद की जा रही है।

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