21 सितम्बर से हो रहे हैं शारदीय नवरात्र प्रारम्भ, क्या आप जानते हैं घटस्थापना की विधि

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Ghat Sthapana

21 सितम्बर से शारदीय नवरात्र प्रारम्भ हो रहे हैं। नवरात्र के प्रथम दिन घटस्थापना की जाती है। घटस्थापना करना अर्थात नवरात्रि के समय ब्रह्मांड में उपस्थित शक्तितत्त्व का घट अर्थात कलश में आवाहन कर उसे सक्रीय करना। शक्तितत्व के कारण वास्तु में उपस्थित कष्टदायक तरंगे नष्ट हो जाती है। कलश में जल, पुष्प, दूर्वा, अक्षत, सुवारी एवं सिक्के डालते हैं।

घटस्थापना की विधि में षोडशोपचार पूजन किया जाता है। पूजाविधि के आरम्भ में सर्वप्रथम आचमन किया जाता है। उसके बाद प्राणायाम किया जाता है तथा अंत में देशकालकथन किया जाता है। उसके बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश का पूजन करते हैं तथा भगवन गणेश के प्रतीक स्वरुप नारियल रखते हैं। भगवान गणेश के पूजन के उपरांत आसन शुद्धि करते हैं। आसान शुद्धि के बाद शरीर शुद्धि की जाती है। इसके उपरांत पूजन सामग्री की शुद्धि की जाती है।

घटस्थापना की विधि:-

  • घटस्थापना में सर्वप्रथम खेत की मिट्टी लाकर उसमे पांच अथवा सात प्रकार के धान बोए जाते हैं। इसमें पांच प्रकार के धानों में गेहूं, जौ, चना, तिल, मूंग आदि होते हैं।
  • जल, चन्दन, पुष्प, दूर्वा, अक्षत, सुपारी तथा सिक्के मिट्टी अथवा ताम्बे के कलश में रखे जाते हैं।
  • यदि घटस्थापना के मन्त्र याद नहीं हो, तो सभी वस्तुओं के नाम लेते हुए “समर्पयामि” का उच्चारण करें।

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