मुंबई…… भारत की आर्थिक राजधानी तथा मायानगरी के नाम से प्रसिद्ध है, लेकिन इसका एक वृहद इतिहास रहा है, इतना ही नहीं ही, मुंबई को एक बार दहेज़ में भी दिया गया है।

पुर्तगालियों ने 23 दिसंबर 1534 को गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह से वसई की संधि के तहत मुंबई छीन लिया। मुंबई में आज भी पुर्तगालियों के निशान जैसे माहिम में स्थित सेंट माइकल चर्च, अँधेरी का सेंट जॉन द बैप्टिस्ट चर्च एवं बांद्रा में स्थित सेंट एंड्रू चर्च आदि स्थित हैं। अंग्रेज मुंबई की भौगोलिक स्थिति एवं समुद्रीय व्यापार के कारण कई वर्षों तक एकाधिकार के लिए प्रयासरत थे।

11 मई 1961 में इंग्लैंड के चार्ल्स द्वितीय एवं पुर्तगाल की राजकुमारी कैथरीन दे ब्रागान्ज़ा के साथ हुई। चूँकि उस वक़्त मुंबई पर पुर्तगालियों का कब्ज़ा था, अतः पुर्तगालियों द्वारा मुंबई को राजकुमारी कैथरीन दे ब्रागान्ज़ा के विवाह के दहेज़ के रूप में इंग्लैंड को दे दिया गया।

27 मार्च 1668 के रॉयल चार्टर के अनुसार, इंग्लैंड ने मुंबई को १० पाउंड प्रति वर्ष की कीमत पर ईस्ट इंडिया कंपनी को लीज पर दे दिया। बाद में 1843 में इसे बॉम्बे प्रेसीडेंसी बना दिया गया।

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