क्या आप जानते हैं भारत की एक बहादुर युवती के बारे में, जिसने चबवाये थे आतंकवादियों को नाकों चने

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Neerja Bhanot Poster

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वो उस हवाई जहाज की क्रू सदस्य थी, जिसका आतंकवादियों ने अपहरण कर लिया था। तथा युवती ने अपनी जान की परवाह किये बिना कई यात्रियों की जान बचाई थी। वो दिन था युवती के जन्मदिन से ठीक दो दिन पहले का दिन, 5 सितम्बर। देश को तो जानकारी भी नहीं थी कि हवा में कौन सा खतरा उड़ रहा है, उस खतरे से निपटने के लिए अपनी जान की भी फ़िक्र नहीं की थी उस साहसी युवती ने।

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जी हाँ, हम बात कर रहे हैं, भारत की एक मात्र अशोक चक्र से सम्मानित महिला तथा “हीरोइन ऑफ हाईजैक” शहीद नीरजा भनोट की। जिनका जन्म चंडीगढ़ में हुआ था। 7 सितम्बर 1963 को जन्मी नीरजा को यह भी नहीं मालूम था कि उनके भाग्य में अशोक चक्र का सम्मान लिखा था। जिनके पिता मुंबई में एक पत्रकार थे और माँ एक गृहणी थी। जिनकी प्रारंभिक शिक्षा चंडीगढ़ में हुई, उसके बाद की पढ़ाई उन्होंने मुंबई से पूरी की।

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5 सितम्बर 1963 का दिन उनके जीवन का अंतिम दिन हुआ, जिसमे उन्होंने अपने नाम से इतिहास रच दिया। मुम्बई से न्यूयॉर्क जा रहे हवाई जहाज पैन ऍम-73 का कराची में चार आतंकवादियों ने अपहरण कर लिया और सारे यात्रियों को बंधक बना लिया। वे आतंकवादी अबू जिंदल संगठन नामक आतंकी संगठन के सदस्य थे, जिनका उद्देश्य सिर्फ अमेरिकी नागरिकों की हत्या करना था।

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नीरजा उस विमान में सीनियर पर्सर के रूप में नियुक्त थीं और उन्होंने यात्रियों की जान बचाना अपना कर्तव्य समझा। जब 17 घंटों के बाद आतंकवादियों ने यात्रियों की हत्या करना शुरू की और विमान में विस्फोटक लगाने शुरू किये तो नीरजा विमान का इमरजेंसी दरवाजा खोलने में कामयाब हुईं और अपनी जान की परवाह नहीं की और बहादुरी का परिचय देते हुए यात्रियों को सुरक्षित निकाला।

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इसी दौरान तीन बच्चों को निकालते हुए एक आतंकवादी ने बच्चों पर गोली चलानी चाही तब नीरजा के बीच में आकार मुकाबला करते समय आतंकवादी की गोलियों से नीरजा की मृत्यु हुई। उन बच्चों में से एक बच्चा जो उस वक्त 7 वर्ष का था, आज एक प्रमुख एयरलाइन में कप्तान है, ने कहा कि शहीद नीरजा भनोट उनके लिए प्रेरणा है।

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नीरजा को उनकी अभूतपूर्व वीरता के लिए उनके मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार “अशोक चक्र” से सम्मानित किया गया। यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि वे इस पुरस्कार से सम्मानित होने वाली भारत की प्रथम एवं एकमात्र महिला है। इसके अलावा उन्हें पाकिस्तान सरकार के द्वारा “तमगा-ए-इन्सानियत” से नवाज़ा गया है और वर्ष 2005 में अमेरिका के द्वारा “जस्टिस फॉर क्राइम अवार्ड” भी दिया गया है।

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शहीद नीरजा के जीवन और उनके शौर्य को याद रखने के लिए निर्देशक राम माधवानी ने एक फिल्म भी बनाई है, जिसका शीर्षक “नीरजा” है तथा इसमें शहीद नीरजा भनोट का किरदार सोनम कपूर के द्वारा निभाया गया है। इसमें नीरजा की माँ का किरदार शबाना आज़मी ने निभाया है।

आज 7 सितम्बर के दिन शहीद नीरजा भनोट की जयंती के अवसर पर Nation Knows परिवार की और से उन्हें शत-शत नमन

 

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